अनंत बातें
ये सब प्रारंभ हुआ होगा मेरी ढेर सारी आशाओं के साथ, ढेर सारे ख्वाब जो मैंने देखें होंगे किसी लालिमा सी ढलती शाम में! ये सब शुरू हुआ होगा मेरी ढेर सारी आशाओं और चंद तुम्हारी ही बातों के साथ तुम्हें सोच कर, महसूस कर मेरे प्रियतम कि इस जहां के हर इक रहस्य को खोज लेते हम साथ–साथ! किसी आँगन में गूंजती बच्चे की किलकारियों की वजहें, या अर्धरात्रि के साए में किसी के कपोलों से बहते नीर से अनुभूत कर लेते उनकी व्यथा, पीड़ा किताबों के पृष्ठों में छुपाए प्रेम पत्रों से हम पूछ लेते किसीके गेसुओं में बंधे पुष्पों से हम जान लेते, परख लेते या किसके विरह में डबडबाई आंखों में हम पढ़ लेते कि प्रीति कितनी गहरी थी! और सुन लेते उस समस्त मौन को हम जो किन्हीं सूने हृदयों में दबके रह गया! हाँ, ये सब आरंभ हुआ होगा मेरे ही अगाध आशावाद और तुम्हारी ही चंद बातों के साथ मेरे प्रियतम मगर, उन तमाम बातों की इतिश्री महज मिलती है उस अंत तक छितरे अंधकार में या मेरे ही मन से होकर बहते निराशाओं के सैलाब में! 2022, सूरज शर्मा