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बंधित स्मृतियाँ

 मैंने अपनी आत्मा का सारा प्रेम सारी प्रीति उन पंक्तियों उन कविताओं में समेट दी है, जिनमें बात होती है सिर्फ तुम्हारी और मेरी, हमारी पहली मुलाकात की, और एक कहानी की शुरुआत की जिनमें बात होती है विरह के असहनीय दर्द की और जिनमें बात होती है, हमारे उस आखिरी किनारे पर मिलन की भी! हां, इनमें अब जो कुछ भी तुम्हारे हिस्से का है तुम रख लो, और अपना अस्तित्व मुझे दे दो!   ~ सूरज शर्मा  

क्षितिज की ओर

बहते चलो इन सैलाबों के साथ-साथ किसी-न-किसी दिन ये तुम्हें किनारे पर जरूर पहुंचा देंगे, तुम तब दूर फैले उस क्षितिज को निहारना, तुम पाओगे कि ये सफर कितना आकर्षक था!   तुम्हारी उनींदी आँखों का भारीपन उस पल में गुम सा जाएगा, तुम्हारे मन के घोड़े भी ठहरेंगे, और वह युद्ध वहीं समाप्त हो जाएगा! तुम बस दूर फैले उस क्षितिज को एक आखिरी बार देखना, तब तुम्हें लगेगा - सच में, यह खुद के अस्तित्व को खोने और पाने का सफर कितना आकर्षक था!   Nov 21, 2021/ सूरज शर्मा