उम्मीद नहीं
तुम्हें लौटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, किसी भी इंसान को किसी दूसरे इंसान के लौटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह अच्छी बात है कि एक वक्त बाद मिले हो, तो साथ में समय बिताओ, मगर उम्मीद मत करो किसी के लौटकर आने की। उम्मीद मत करो कि तुम मुझे फिर से मिल पाओगे या मैं तुम्हें फिर से देख सकूंगा। जिंदगी काफी नाजुक है, कभी भी टूटकर बिखर सकती है। एक वक्त बीत गया है। मैं अक्सर खुद के लिखे को पढ़ता हूँ, तो खुद पर हंसी आती है—हाँ, हंसी आती है। नादान नहीं कहना चाहिए, बेवकूफ ठीक है। इंसान की जिंदगी में एक उम्र ऐसी आती है, जिसके बाद वे बड़े होना छोड़ देते हैं। उनके विचारों की सीमाएं चरम पर पहुंच जाती हैं। उस वक्त वे जो कुछ लिखते हैं, वह उनकी वह रचना होती है जिसे वे अपने बाकी लिखे की तुलना में सबसे बेहतर कह सकते हैं। लेकिन उससे आगे कुछ नहीं है, और यह कई सारी सीमाओं और बंदिशों के साथ आता है। तुम वही सारे शब्दों, ख्यालों और विचारों के इर्द-गिर्द घूमते रहते हो। वह रास्ता सीमाहीन नहीं होता। तुम उससे बेहतर नहीं लिख सकते। मेरी सालों से इच्छा थी किसी सीमाहीन रास्ते पर खुद को गुम कर देने की, मगर अब लगता है कि ...