Posts

Showing posts from 2025

उम्मीद नहीं

तुम्हें लौटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, किसी भी इंसान को किसी दूसरे इंसान के लौटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह अच्छी बात है कि एक वक्त बाद मिले हो, तो साथ में समय बिताओ, मगर उम्मीद मत करो किसी के लौटकर आने की। उम्मीद मत करो कि तुम मुझे फिर से मिल पाओगे या मैं तुम्हें फिर से देख सकूंगा। जिंदगी काफी नाजुक है, कभी भी टूटकर बिखर सकती है। एक वक्त बीत गया है। मैं अक्सर खुद के लिखे को पढ़ता हूँ, तो खुद पर हंसी आती है—हाँ, हंसी आती है। नादान नहीं कहना चाहिए, बेवकूफ ठीक है। इंसान की जिंदगी में एक उम्र ऐसी आती है, जिसके बाद वे बड़े होना छोड़ देते हैं। उनके विचारों की सीमाएं चरम पर पहुंच जाती हैं। उस वक्त वे जो कुछ लिखते हैं, वह उनकी वह रचना होती है जिसे वे अपने बाकी लिखे की तुलना में सबसे बेहतर कह सकते हैं। लेकिन उससे आगे कुछ नहीं है, और यह कई सारी सीमाओं और बंदिशों के साथ आता है। तुम वही सारे शब्दों, ख्यालों और विचारों के इर्द-गिर्द घूमते रहते हो। वह रास्ता सीमाहीन नहीं होता। तुम उससे बेहतर नहीं लिख सकते। मेरी सालों से इच्छा थी किसी सीमाहीन रास्ते पर खुद को गुम कर देने की, मगर अब लगता है कि ...

एक, दो, तीन .....

मैं आजकल सब कुछ हिस्सों में देखता हूँ। मेरा एक हिस्सा हर दिन की जद्दोजहद से जूझ रहा होता है, और दूसरा उस हिस्से को देखता है— एकटक, अपलक, एक जिज्ञासा के साथ कि वह कहाँ तक जाएगा! यह अजीब है बेहद अजीब है कि मैं खुद को टुकड़ों में देख सकता हूँ—एक, दो, तीन, और न जाने कितने हिस्से, जो उगते सूरज के साथ अपना आकार लेते हैं और शाम के अंधकार में विलीन हो जाते हैं। फिर, कुछ हिस्सों को खुद को एक सुकून भरी नींद के लिए रात भर तड़पना पड़ता है। एक हिस्सा नीरस आँखें लेकर सुबह 8:30 की क्लास में जाता है, तो दूसरा 10:10 की क्लास में। चाहकर भी तुम इन हिस्सों से खुद को अलग नहीं देख सकते, इन्हें खत्म नहीं कर सकते। तुम एक हिस्से को मिटाओगे, तो दूसरा और तीसरा फिर से उभर आएगा—फिर से जीने के लिए! आह! मेरे मन की शिथिलता और आँखों का भारीपन! मेरा एक हिस्सा डूबते सूरज का पीछा करते परिंदों में खुद को ढूँढने की कोशिश करता है, तो दूसरा चलते-चलते पेड़ों की पत्तियाँ अनायास तोड़ता, मरोड़ता, और राह पर बिखेर देता है। मैं उस विशाल वृक्ष का गुनहगार हूँ, पर ये भी तो संभव है कि मेरा बार-बार उसके पास जाना और उसकी पत्तियों को तोड़...