बंधित स्मृतियाँ

 मैंने
अपनी आत्मा का

सारा प्रेम
सारी प्रीति

उन पंक्तियों
उन कविताओं में समेट दी है,

जिनमें बात होती है
सिर्फ तुम्हारी और मेरी,

हमारी पहली मुलाकात की,
और एक कहानी की शुरुआत की

जिनमें बात होती है
विरह के असहनीय दर्द की

और जिनमें बात होती है,
हमारे उस आखिरी किनारे पर मिलन की भी!

हां, इनमें अब जो कुछ भी तुम्हारे हिस्से का है
तुम रख लो,

और
अपना अस्तित्व
मुझे दे दो!

 

~ सूरज शर्मा

 

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